यूरोप की धमकी से ग्रीनलैंड पर रातोंरात पलट क्यों गए ट्रम्प?

Greenland: ट्रम्प के 75 मिनट के भाषण के बाद माना जा रहा है कि अब अमेरिका ग्रीनलैंड (Greenland) को हासिल करने के लिए मिलिट्री एक्शन या ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा। 21 जनवरी को दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने ऐलान किया कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करेंगे, लेकिन ताकत से नहीं। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कहते थे कि इसे हर हाल में हासिल करेंगे, वेनेजुएला जैसे मिलिट्री एक्शन लेंगे, शांति के बारे में नहीं सोचेंगे। लेकिन रातोंरात ट्रम्प का रुख बदल गया है।
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एंटी-ट्रम्प माहौल की लामबंदी
21 जनवरी को ट्रम्प के भाषण के बाद यूरोपीय संसद ने यूरोपीय यूनियन-अमेरिका ट्रेड डील का काम रोक दिया है। क्योंकि ट्रम्प ने अपने भाषण के दौरान कई बार ..ग्रीनलैंड को लेकर कमेंट किया।
एक दिन पहले दावोस में ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, ‘नए-नए टैरिफ लगाए जा रहे हैं। यह बात बिल्कुल मंजूर नहीं की जा सकती, खासकर तब जब इन टैरिफ का इस्तेमाल किसी देश की जमीन और संप्रभुता पर दबाव बनाने के लिए किया जाए।’
ट्रम्प के रवैये से NATO और यूरोपीय यूनियन के देश नाराज हैं। वे इसे दबाव और ब्लैकमेल की राजनीति बता रहे हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों का गठबंधन यानी ‘वेस्टर्न अलायंस’ भी कमजोर हो रहा है।
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अमेरिका की लीडरशिप को खतरा (Greenland)
चीन और रूस को अपनी ग्लोबल पोजिशन मजबूत करने का मौका मिल रहा है। ये देश नए अलायंस और अन्य ग्लोबल ऑर्डर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया एक ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ रही है, जहां अमेरिका का ग्लोबल ऑर्डर न हो और देश अपना हित देख सकें।
हाल ही में आई पेंटागन की रिपोर्ट में चीन और अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी-2025 में रूस को खतरा बताते हुए उन पर नजर रखने की बात कही गई है।
ट्रम्प के भाषण से एक दिन पहले दावोस में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने कहा, ‘अमेरिका का वर्चस्व था, लेकिन अब यह व्यवस्था नहीं टिकने वाली। अमेरिका की गुटबंदी से बाकी देश और ज्यादा गरीब और कमजोर हो जाएंगे। कम ताकतवर देशों को अपने जैसी सोच वाले पार्टनर्स के साथ गठबंधन बनाना चाहिए।
NEWS SOURCE Credit: Dainik Bhaskar




