दिल्ली में जहां हुई पत्थरबाजी, मस्जिद के पास उसके कागज नहीं: 113 साल पुराने पेपर गायब

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High Court: हाईकोर्ट के आदेश पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास 36,400 वर्ग फीट में बने एक बंद पड़े बारात घर और प्राइवेट क्लिनिक के अलावा पार्किंग ढहाने की तैयारी थी। जेसीबी चलनी शुरू हुईं, तभी भीड़ जुट गई। MCD के स्टाफ और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। 5 पुलिस वाले घायल हो गए। पुलिस ने हालात संभाले और MCD के अमले ने कब्जे तोड़ दिए।

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फैज-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजिंग कमेटी का दावा है कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई है, वह 100 साल से ज्यादा पुरानी नोटिफाइड वक्फ संपत्ति है। दैनिक भास्कर ने कमेटी के जनरल सेक्रेटरी मतलूब करीम, मस्जिद की तरफ से पैरवी कर रहे वकील इरशाद हनीफ और वक्फ बोर्ड की वकील फरहत जहान रहमानी से बात की। इससे समझ आया कि पूरा मामला कागजों की वजह से उलझा है। मस्जिद के पास उस जमीन के कागज नहीं हैं।

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High Court: वक्फ बोर्ड की वकील बोलीं

हमने जमीन विवाद पर दिल्ली वक्फ बोर्ड की तरफ से कोर्ट में पेश हुईं वकील फरहत जहान रहमानी से बात की। वे कहती हैं, ‘दो साल से बोर्ड नहीं है, यानी अभी कोई पैनल नहीं है। पैनल की गैर-मौजूदगी में जिन्हें सीईओ बनाया गया था, वे भी रिटायर हो चुके हैं। अभी कोई अधिकारी नहीं है, जो फाइल को मंजूरी दे। वक्फ बोर्ड की लीगल सेल से कोई निर्देश नहीं आता है, तब तक हम कोई फाइल जमा नहीं कर सकते।

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मस्जिद कमेटी का दावा

मस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी मतलूब करीम से हमने फोन पर बात की। जमीन के कागजों पर वे कहते हैं, ‘पेपर जमा करने की जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड की थी। वक्फ बोर्ड दिल्ली सरकार के तहत आता है। दिल्ली सरकार में अभी कौन लोग हैं, आप जानते हैं। वे 1913 के पेपर नहीं दिखा रहे हैं, जिसमें 3 बीघा 17 बिस्वा जमीन का जिक्र है। उन्होंने सिर्फ 1940 का पेपर दिखाया, जिसमें 0.195 एकड़ जमीन के बारे में लिखा है।’

दरअसल, MCD कमिश्नर ने 22 दिसंबर के अपने आदेश में कहा था कि 1940 में बनी डीड के तहत मिली 0.195 एकड़ ज़मीन के अलावा मस्जिद कमेटी और वक्फ बोर्ड के पास बाकी जमीन पर मालिकाना हक नहीं है।

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